FRESH V. - Hindi साहित्य
HOW TO GET A FRESH V.
According to "বিজ্ঞান ও দেবদেবী" by নিগূঢ়ানন্দ, Bhagawan means the owner of many bhag/vag./v.
Yielding to angry rishi Durvasa aka Krishnatreya, the angriest guy in the world, who angrily cursed all who displeased him and turned them into crows etc., raped Kunti prayed to Durvasa that she might become a virgin again by getting reborn (and therefore with a fresh v.). Read the interesting novel "THE KAUNTEYAS" by MADHAVI S. MAHADEVAN, W (Westland) ₹350. (I wonder if the very crude and vulgar obscene taboo word "cunt" is derived from Kunti.)
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भगवान नम्बर दो
मैं हिंदी भाषा में ज्यादा online posts करता लेकिन सच तो यह है कि English is a much more important language at present than Hindi or any other language - I think English is the most important international language of communication at present.
मुझे तो लगता है आजकल self-styled "poet" यानि "कवि" के लिए गद्य और पद्य में कोई फर्क नहीं ।
मैं सोचता था कि हिंदी "साहित्य" का भविष्य बिलकुल अंधेरा है - लेकिन एक excellent Hindi लेखक तो थे/हैं - नाम भूल गया ** - who wrote the novel "भगवान नम्बर दो" ...
** "भगवान नम्बर दो" ढूंढ के निकाला from My personal library - I never write about any book which I have not bought - I have about 2000-3000 books in My personal library kept on many bookshelves in 2 rooms. The novelist's name is - उपन्यास लेखक का नाम है - वेद प्रकाश शर्मा (मुझे मालूम नहीं यह real name या fake name).
BHAGWAN NUMBER DO by VED PRAKASH SHARMA, 287 pages, price ₹ 50 only - "भगवान नम्बर दो" by वेद प्रकाश शर्मा, मूल्य : पचास रूपये मात्र, प्रकाशक :
तुलसी पेपर बुक्स
K-1265, शास्त्रीनगर
मेरठ-250004
पत्राचार के लिए लेखक का पता:
वेद प्रकाश शर्मा
K-1264, शास्त्रीनगर
मेरठ-250004
The title of the novel makes Me suspect that the addresses may be fake addresses. मुझे तो लगता है दिये गए पते दो नम्बरी पते हैं - I bought the novel from a bookshop on the Guwahati railway station platform several years ago, on April 27, 2012, to be exact.
The book's ISBN number is not given - किताब का ISBN नम्बर नहीं है
From the advertisement on the back cover of "भगवान नम्बर दो":
वेद प्रकाश शर्मा वह राईटर जिसके उपन्यास का MRP रेट [जब] ₹10 था [तब] ₹150 में ब्लैक हुआ ... India के Harry Potter ... Sharma is the 'Jhatka Specialist' ... Ved Prakash Sharma is the presiding deity of the popular Hindi fiction.
Excerpts from "भगवान नम्बर दो":
"देखो रेनू, वह रहा अपना सचीन - कैसा जंच रहा है [कैसा प्रतीत हो रहा है], साला ।"
विमान की सीढ़ियां उतरते एक बेहद आकर्षक युवक की तरफ इशारा करते हुए सुन्दर चीखा ।
एयरपोर्ट के 'वेटिंग फ्लोर' पर खड़े अन्य व्यक्तियों ने अजीब से अंदाज में उन दोनों की तरफ देखा ।
***
रेनू ने सुन्दर से अपेक्षाकृत धीमे स्वर में कहा - "आपके यह दोस्त मिलिट्री आफिसर ही हैं न?"
"तुम्हें कुछ शक है?"
"नहीं ।" रेनू मुस्कराई - "लेकिन आपके यह दोस्त तो सूट, टाई और फैल्ट हैट में बिल्कुल बम्बइया हीरो लग रहे हैं ।"
सुंदर ने जोरदार ठहाका लगाया [he exploded], बोला - "बम्बइया हीरो बताकर मेरे दोस्त की अहमीयत कम मत करो रेनू - छोटी-मोटी हैसियत का नहीं है अपना यार - मिलिट्री इंटेलीजेंस का बहुत बड़ा जासूस है ।"
"कितनी बार बताओगे यह बात?"
"जब तक तुम्हारे भेजे [brain] में पूरी तरह समा नहीं जाएगी ।"
इससे पहले कि रेनू कुछ कहती, पीछे से सुन्दर के सिर पर जोरदार चपत [slap] के साथ एक कड़कदार आवाज आई - "अबे ओ, मेरी भाभी पर क्यों अपना पुलिसिया रौब गांठ रहा है?"
सुन्दर पलटकर उससे लिपट गया - उसे कसकर अपनी बाहों में भींचता हुआ [दबाता हुआ] बोला - "साले, एक तो तेरी वकालत कर रहा था और उस पर तू मुझे ही डांट रहा है?"
"कुछ भी हो - सचिन सिंह की भाभी पर अब किसी का रौब नहीं चलेगा ।" कहते हुए सचिन ने भी उसे कस लिया ।
कुछ क्षण यूं ही लिपटे खड़े रहे दोनों ।
इस 'पोज' को तोड़ा सचिन ने - "अबे हटेगा भी अब - जरा हमें अपनी भाभी से दुआ सलाम करने दे ।"
इसके साथ ही सचिन उसे हठाकर रेनू की तरफ बढ़ गया ।
रेनू के सामने पहुंचकर सचिन ने अपनी दाईं आंख एक विशेष अंदाज में दबा दी ।
सचिन की यह हरकत रेनू के लिए बिल्कुल अप्रत्याशित थी ।
सचिन ने अपना चेहरा उसके चेहरे पर झूका दिया - साथ ही नाटकीय अंदाज में बोला - "इस नाचीज़ का आदाब कबूल कीजिए भाभी जान ।"
रेनू अपने चेहरे पर सचिन की गर्म सांसें महसूस करके हड़बड़ाकर पीछे हट गई ।
सचिन खिलखिलाकर हंस पड़ा - उसकी इस हंसी में सुन्दर ने भी पूरा साथ दिया ।
"बंदा पसंद नहीं आया भाभी जान?" सचिन ने शरारती अंदाज में मुस्कुराते हुए पूछा ।
"न...नहीं तो... "
"इसका मतलब बंदा आपको पसंद है ।" सचिन ने चुटकी ली ।
रेनू पर कोई जवाब न बना ।
जाने क्यों सचिन का यह व्यवहार उसे कुछ परेशान-सा कर रहा था - वह यह निर्णय नहीं कर पा रही थी कि इन हरकतों के पीछे कौन-सी भावना काम कर रही थी?
गंदी अथवा दोस्त की पत्नी के लिए निश्छल [निष्कपट, छलरहित; जैसे - निश्छल हृदय], स्वच्छंद [बिना किसी भय, विचार या संकोच के] मजाक की भावना ।
अपनी सोच में गुम थी रेनू ।
"ले बेटे सुन्दर, मैंने तेरा पत्ता तो साफ किया । अब तू अपनी तलाश नए सिरे से जारी कर दे - भाभीजान को तो यह बंदा पसंद है ।"
"अगर मियां-बीबी राजी तो क्या करेगा काजी?"
रेनू को सचिन और सुन्दर का यह मजाक बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा ।
***
Kishalay Sinha किशलय सिन्हा जी [G]
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