वेद प्रकाश शर्मा: "भगवान नम्बर दो"
MISSING MINERS
Miners who get "missing" could be top NAZIS who escaped into Earth through secret tunnels *** ... Very SAD... PATHETIC... Because EACH male and female NAZI living in panic ON AND INSIDE Earth is audio video RECORDED CONTINUOUSLY AND CAN BE VERY EASILY BURNED AND VAPORIZED BY LASER AT ANY MOMENT - SINGLY OR EN MASSE. (Cf. Missing Meghalaya miners.)
*** Satan/Brahma [f. "Creator"]/Peter/Peter Funk/Hitler/Peter V.K. Funk/Stephen/Steve/Robert/Y/PF and the Devil/Shiv [f. "Destroyer"]/Shankar/Mahadev/Maheshwar/Michael/Sw. Viv./Z/NL/Norman Lewis and their fucking gang of Nazis have used this VERY FUNNY method of ESCAPE into and out of the inside of Earth for billions of years. (NL & PF & Queen of Hell B./Pamela have tortured opponents John, Christ/Krishna/other names AND billions of male humans and have raped and tortured billions of female humans in the underground swastika-symbol Nazi HELL inside Earth for billions of years.) Nazis are now shitting in their pants in panic.
অশ্ব ডিম্ব? We will show you, fuckers.
Kishalay Sinha [G]
वेद प्रकाश शर्मा: भगवान नम्बर दो
सरल s. हिन्दीवालियों और उर्दुवालियों को help करने का बहुत दिल करता है ... मुझे लगता है हिन्दी साहित्य बहुत weak है - "प्रेमचंद" का face तो शायद Hitler का face जैसा like E. M. Forster perhaps ... एक बढ़िया modern Hindi novelist तो हैं - वेद प्रकाश शर्मा - author of the interesting Hindi novel "भगवान नम्बर दो"** (Rs. 50 only पचास रूपये मात्र) and lots of other Hindi novels, published by तुलसी पेपर बुक्स, K-1265, शास्त्रीनगर, मेरठ-250004/ K-1265, Shastri Nagar, Meerut-250004 - मुझे मालूम नहीं वेद प्रकाश शर्मा जिंदा हैं या मर गये हैं - ये लेखक वेद प्रकाश शर्मा "भारत के सबसे ज्यादा बिकने वाले लेखक" according to the publisher तुलसी पेपर बुक्स - लेकिन मुझे लगता है किसी ने शायद आजतक ये first class लेखक का नाम तक सुना नहीं - very poor struggling quality publisher बेचारे को थोड़ा ज्यादा advertise करना पड़ता है, क्या करें जी ...
हर s. बेचारी सोचती है कि सिर्फ बेचारी ही एकमात्र s. लड़की - the only s. girl - who is qualified to have illicit s. with Him ... बेचारी ...
** Excerpt from वेद प्रकाश शर्मा: "भगवान नम्बर दो":
"देखो रेनू, वह रहा अपना सचिन - साला ৷" विमान की सीढ़ियां उतरते एक बेहद [बहुत अधिक] आकर्षक युवक की तरफ इशारा करते हुए सुन्दर चीखा ৷
एयरपोर्ट के 'वेटिंग फ्लोर' [waiting floor] पर खड़े अन्य व्यक्तियों ने अजीब से अंदाज में उन दोनों की तरफ देखा ৷
सुन्दर, लोगों की नजरों से बेख़बर प्रफुल्लित-सा होकर विमान से अन्तिम यात्री के रूप में उतर रहे युवक की तरफ देखता हुआ बराबर उछलता हुआ चीख रहा था ৷
अपनी तरफ लोगों की उपहास भरी नजरें और मुस्कराहट देखकर रेनू अपने पति की हरकत पर झेंप [संकोच, लज्जा]-सी रही थी ৷ अपनी इस झेंप को कुछ कम करने के उद्देश्य से रेनू ने सुन्दर से अपेक्षाकृत धीमे स्वर में कहा - "आपके यह दोस्त मिलिट्री [military] आफिसर ही हैं न?"
"तुम्हें कुछ शक है?"
"नहीं ৷" रेनू मुस्कराई - "मिलिट्री [military] आफिसर का नाम आते ही जेहन [दिमाग] में मिलिट्री की 'काई' रंग की [moss-green] वर्दी [uniform] पर सजे ढेर सारे तमगे [medals] और सितारे [stars], सिर पर शेर [lion] चिन्ह से युक्त कैप [cap] और पैरों में भारी-भरकम [heavy, bulky] जूते पहने लम्बा-चौड़ा व्यक्ति सामने आ जाता है - लेकिन आपके यह दोस्त तो सूट [suit], टाई [tie] और फैल्ट हैट [felt hat] में बिल्कुल बम्बइया हीरो लग रहे हैं ৷"
सुन्दर ने जोरदार ठहाका लगाया [explosion of laughter], बोला - "बम्बइया हीरो बताकर मेरे दोस्त की अहमियत [importance] कम मत करो रेनू - छोटी-मोटी हैसियत [capacity, ability] का नहीं है अपना यार - मिलिट्री इंटेलीजेन्स [military intelligence] का बहुत बड़ा जासूस [detective, গোয়েন্দা] है ৷"
"कितनी बार बताओगे यह बात?"
"जब तक तुम्हारे भेजे में [मगज में, brain में] पुरी तरह समा नहीं जाएगी ৷"
इससे पहले कि रेनू कुछ कहती, पीछे से सुन्दर के सिर पर जोरदार चपत [slap] के साथ एक कड़कदार आवाज़ आई [कड़क = crack of thunder, कड़ी और भयंकर आवाज़; तड़ित/lightning की चमक के बाद होनेवाली ध्वनि; जैसे - बिजली कड़कना] - "अबे ओ, मेरी भाभी पर क्यों अपना पुलिसिया रौब [रौब = रोब = तेज, प्रताप, आतंक; जैसे - रोब पैदा करना] गांठ रहा है? [गांठना = अनुचित रूप से कार्य पूरा करना; जैसे - मतलब गांठना]
सुन्दर पलटकर उससे लिपट गया [= आलिंगन किया, embraced him] - उसे कसकर अपनी बांहों में भींचता हुआ [दबा कर] बोला - "साले, एक तो तेरी वकालत कर रहा था और उस पर तू मुझे ही डांट रहा है?"
"कुछ भी हो - सचिन सिंह की भाभी पर अब किसी का रौब नहीं चलेगा ৷" कहते हुए सचिन ने भी उसे कस लिया ৷
कुछ क्षण यूं ही लिपटे खड़े रहे दोनों ৷
इस 'पोज' को तोड़ा सचिन ने - "अबे हटेगा भी अब - जरा हमें अपनी भाभी से दुआ सलाम करने दे ৷"
इसके साथ ही सचिन उसे हटाकर रेनू की तरफ बढ़ गया ৷
रेनू के सामने पहुंचकर सचिन ने अपनी दाईं आंख एक विशेष अंदाज में दबा दी ৷
सचिन की यह हरकत रेनू के लिए बिल्कुल अप्रत्याशित थी ৷
एकदम सकपका-सी गई [surprised] वह ৷
अभी अपनी इस स्थिति से उवर [बचना] भी न पाई थी कि सचिन ने अपना चेहरा उसके चेहरे पर झुका दिया - साथ ही नाटकीय अंदाज में बोला - "इस नाचीज [तुच्छ और हीन] का आदाब कबूल कीजिए भाभी जान ৷"
रेनू अपने चेहरे पर सचिन की गर्म सांसे महसूस करके हड़बड़ाकर [घबरा कर] पीछे हट गई ৷
सचिन खिलखिलाकर हंस पड़ा - उसकी इस हंसी में सुन्दर ने भी पूरा साथ दिया ৷
"बंदा पसंद नहीं आया भाभी जान?" सचिन ने शरारती अंदाज में मुस्कराते हुए पूछा ৷
"न...नहीं तो..."
"इसका मतलब बंदा आपको पसंद है ৷" सचिन ने चुटकी ली ৷
रेनू पर कोई जवाब न बना ৷
जाने क्यों सचिन का यह व्यवहार उसे कुछ परेशान-सा कर रहा था - वह यह निर्णय नहीं कर पा रही थी कि इन हरकतों के पीछे कौन-सी भावना काम कर रही थी?
गंदी अथवा दोस्त की पत्नी के लिए निश्छल [छलरहित, निष्कपट; जैसे - निश्छल हृदय], स्वच्छंद [बिना किसी भय, विचार या संकोच के] मजाक की भावना ৷
अपनी सोच में गुम थी रेनू ৷
(From वेद प्रकाश शर्मा: "भगवान नम्बर दो", "BHAGWAN NUMBER DO" by VED PRAKASH SHARMA, तुलसी पेपर बुक्स)
The above text without notes:
"देखो रेनू, वह रहा अपना सचिन - साला ৷" विमान की सीढ़ियां उतरते एक बेहद आकर्षक युवक की तरफ इशारा करते हुए सुन्दर चीखा ৷
एयरपोर्ट के 'वेटिंग फ्लोर' पर खड़े अन्य व्यक्तियों ने अजीब से अंदाज में उन दोनों की तरफ देखा ৷
सुन्दर, लोगों की नजरों से बेख़बर प्रफुल्लित-सा होकर विमान से अन्तिम यात्री के रूप में उतर रहे युवक की तरफ देखता हुआ बराबर उछलता हुआ चीख रहा था ৷
अपनी तरफ लोगों की उपहास भरी नजरें और मुस्कराहट देखकर रेनू अपने पति की हरकत पर झेंप-सी रही थी ৷ अपनी इस झेंप को कुछ कम करने के उद्देश्य से रेनू ने सुन्दर से अपेक्षाकृत धीमे स्वर में कहा - "आपके यह दोस्त मिलिट्री आफिसर ही हैं न?"
"तुम्हें कुछ शक है?"
"नहीं ৷" रेनू मुस्कराई - "मिलिट्री आफिसर का नाम आते ही जेहन में मिलिट्री की 'काई' रंग की वर्दी पर सजे ढेर सारे तमगे और सितारे, सिर पर शेर चिन्ह से युक्त कैप और पैरों में भारी-भरकम जूते पहने लम्बा-चौड़ा व्यक्ति सामने आ जाता है - लेकिन आपके यह दोस्त तो सूट, टाई और फैल्ट हैट में बिल्कुल बम्बइया हीरो लग रहे हैं ৷"
सुन्दर ने जोरदार ठहाका लगाया, बोला - "बम्बइया हीरो बताकर मेरे दोस्त की अहमियत कम मत करो रेनू - छोटी-मोटी हैसियत का नहीं है अपना यार - मिलिट्री इंटेलीजेन्स का बहुत बड़ा जासूस है ৷"
"कितनी बार बताओगे यह बात?"
"जब तक तुम्हारे भेजे में पुरी तरह समा नहीं जाएगी ৷"
इससे पहले कि रेनू कुछ कहती, पीछे से सुन्दर के सिर पर जोरदार चपत के साथ एक कड़कदार आवाज़ आई - "अबे ओ, मेरी भाभी पर क्यों अपना पुलिसिया रौब गांठ रहा है?"
सुन्दर पलटकर उससे लिपट गया - उसे कसकर अपनी बांहों में भींचता हुआ बोला - "साले, एक तो तेरी वकालत कर रहा था और उस पर तू मुझे ही डांट रहा है?"
"कुछ भी हो - सचिन सिंह की भाभी पर अब किसी का रौब नहीं चलेगा ৷" कहते हुए सचिन ने भी उसे कस लिया ৷
कुछ क्षण यूं ही लिपटे खड़े रहे दोनों ৷
इस 'पोज' को तोड़ा सचिन ने - "अबे हटेगा भी अब - जरा हमें अपनी भाभी से दुआ सलाम करने दे ৷"
इसके साथ ही सचिन उसे हटाकर रेनू की तरफ बढ़ गया ৷
रेनू के सामने पहुंचकर सचिन ने अपनी दाईं आंख एक विशेष अंदाज में दबा दी ৷
सचिन की यह हरकत रेनू के लिए बिल्कुल अप्रत्याशित थी ৷
एकदम सकपका-सी गई वह ৷
अभी अपनी इस स्थिति से उवर भी न पाई थी कि सचिन ने अपना चेहरा उसके चेहरे पर झुका दिया - साथ ही नाटकीय अंदाज में बोला - "इस नाचीज का आदाब कबूल कीजिए भाभी जान ৷"
रेनू अपने चेहरे पर सचिन की गर्म सांसे महसूस करके हड़बड़ाकर पीछे हट गई ৷
सचिन खिलखिलाकर हंस पड़ा - उसकी इस हंसी में सुन्दर ने भी पूरा साथ दिया ৷
"बंदा पसंद नहीं आया भाभी जान?" सचिन ने शरारती अंदाज में मुस्कराते हुए पूछा ৷
"न...नहीं तो..."
"इसका मतलब बंदा आपको पसंद है ৷" सचिन ने चुटकी ली ৷
रेनू पर कोई जवाब न बना ৷
जाने क्यों सचिन का यह व्यवहार उसे कुछ परेशान-सा कर रहा था - वह यह निर्णय नहीं कर पा रही थी कि इन हरकतों के पीछे कौन-सी भावना काम कर रही थी?
गंदी अथवा दोस्त की पत्नी के लिए निश्छल, स्वच्छंद मजाक की भावना ৷
अपनी सोच में गुम थी रेनू ৷
(From वेद प्रकाश शर्मा: "भगवान नम्बर दो", "BHAGWAN NUMBER DO" by VED PRAKASH SHARMA, तुलसी पेपर बुक्स)
Kishalay Sinha किशलय सिन्हा जी [G]
प्रस्तुत है - 'भगवान नम्बर दो'
एक बार किसी ने मुझसे पूछा था कि आपको हर बार अपने उपन्यास के लिए टॉपिक [topic] कहां से मिल जाते हैं ৷ यह सवाल शायद इसलिए उठा क्योंकि आप जानते ही हैं कि मेरे उपन्यास के टॉपिक एकदम नए होते हैं ৷ इस बाबत कहना चाहूंगा, टॉपिक चाहे उपन्यास का हो या फिल्म का, हमारे आस-पास घटनाओं के रूप में बिखरे पड़े होते हैं, जरुरत होती है उन्हें समझने और संवारने [सजाने] की ৷ मैं यही करता हूं ৷ मैं अपनी सटीक [बिल्कुल ठीक, उपयुक्त] निगाह टिकाए रखता हूं अपने आस-पास, वहीं से मिलता है मुझे टॉपिक ৷
हां, एक बात और ৷ आपके जो ढेरों पत्र मुझे मिलते हैं, कई दफा उनमें से कोई पाठक भी मुझे अपनी तरफ से विषय सुझा देता है ৷ मैं आपके पत्रों को गौर से [ध्यान से, attentively] पढ़ता हूं ৷ खास [special] पत्रों पर मनन भी करता हूं ৷ किसी पाठक को मेरे किसी उपन्यास में अपने आइडिए [idea] की झलक भी मिली हो सकती है ৷ आप जानते हैं कि - वेद मौलिक लिखता है और उसकी स़्टाइल [style] हर उपन्यास की खास अंदाज [ढंग] वाली होती है ৷ तब ही तो आप मेरे उपन्यासों को डूबकर पढ़ते हैं और आप खुद को उपन्यास के पात्रों के आस-पास पाते हैं ৷
बढ़ते कदम - आपको यह जानकर भी खुशी होगी कि 'तुलसी पेपर बुक्स' के कदम निरंतर आगे बढ़ते जा रहे हैं ৷ [बेचारा]... आप जानते ही हैं [sorry मुझे मालूम नहीं था] - 'तुलसी पेपर बुक्स' का मालिक मेरा बेटा शगुन शर्मा है **৷ इस नाते यह मेरी अपनी प्रकाशन संस्था है ৷ आप देख ही रहे हैं [?!!] अन्य लगभग सभी लेखकों के नए और पुराने उपन्यासों के अलावा 'तुलसी पेपर बुक्स' से मेरे पूर्व प्रकाशित उपन्यासों को भी शानदार गेटअप [getup] में प्रकाशित किया जा रहा है ৷ [बेचारा ... मुझे moving short story "Quality" by literature Nobel prize winner John Galsworthy याद आता है - G]...
हमारा लक्ष्य आपको उच्च पठनीय सामग्री, जिसमें उपन्यास, बाल साहित्य और ज्ञान-विज्ञान आदि शामिल हैं, उपलब्ध कराना है [बेचारा] ... हम अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर आगे बढ़ रहे हैं ৷ [please stop ... अब तो दर्द के सिवा हंसी आ रहा है] ... हमें अपने प्रयासों में क्या-क्या सुधार करने हैं, यह पता लगेगा आपके पत्रों से ৷ आपके सुझाव ही तो हमारा समय-समय पर मार्गदर्शन करते हैं ৷
आपके निष्पक्ष [?] पत्रों का प्रतीक्षक [प्रतीक्षा करनेवाला] -
आपका
वेद प्रकाश शर्मा
'तुलसी'
K-1265, शास्त्रीनगर
मेरठ-4
email - novelistved@gmail.com
only for SMS
मो. : 9760184359
9319978918
पत्राचार के लिए लेखक का पता :
K-1264, शास्त्रीनगर
मेरठ-4
[मुझे लगता है, postal address, email address, mobile number सब fake हैं ... बेचारा … Anyway, I bought this novel six years ago, on April 27, 2012 to be exact, so even if the above details were not fake but genuine, they may be non-existent by now, for obvious and painful reasons... Pathetic ... Tragic... - G]
** [शगुन = शकुन = 1 शुभ-अशुभ की पूर्व सूचना, सगुन 2 शुभ घड़ी या शुभ अवसर पर होनेवाला मंगल कार्य संबंधी गीत; ज्योतिषी/astrologer is शकुन जाननेवाला; however, in Bengali, শকুন = a vulture]
Kishalay Sinha किशलय सिन्हा जी [G]
Please note that I am NOT "military intelligence का बहुत बड़ा जासूस" - I am G.
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